दिन 3 (मई)
दिन 3 (मई): दूसरे के स्थान पर स्वयं को रखना (Empathy and Perspective) भारतीय दर्शन से विचार: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः […]
दिन 3 (मई): दूसरे के स्थान पर स्वयं को रखना (Empathy and Perspective) भारतीय दर्शन से विचार: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः […]
दिन 2 (मई): क्रोध का प्रबंधन और क्षमा (Managing Anger and Forgiveness) भारतीय दर्शन से विचार: “क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।” –
दिन 1 (मई): कर्तव्य का विस्तार: स्वयं से समाज तक भारतीय दर्शन से विचार: “अहिंसा परमो धर्मः।” – महाभारत/मनुस्मृति व्याख्या:
दिन 30 (अप्रैल): आंतरिक शांति: सबसे बड़ा पुरस्कार भारतीय दर्शन से विचार: “समत्वं योग उच्यते (Samatvaṁ Yoga Ucyate): समता (समरूपता
दिन 29 (अप्रैल): केवल चरित्र की हानि: सच्ची पीड़ा आंतरिक होती है भारतीय दर्शन से विचार: “सत्यं न विनश्यति (Satyaṁ
दिन 28 (अप्रैल): जानबूझकर असुविधा: आरामदायक जीवन को ना कहें भारतीय दर्शन से विचार: “तपसा क्षीयते पापम् (Tapasā Kṣīyate Pāpam):
दिन 27 (अप्रैल): संबंधों का अस्थायीपन: हर लगाव को क्षणिक जानना भारतीय दर्शन से विचार: “सर्वं क्षणभंगुरम् (Sarvaṁ Kṣaṇabhaṅguram): सब
दिन 26 (अप्रैल): सबसे बुरे की तैयारी: मानसिक पूर्वाभ्यास (Premeditatio Malorum) भारतीय दर्शन से विचार: “वैराग्य (Vairāgya) का पहला चरण
दिन 25 (अप्रैल): कार्य, न कि शब्द: अपनी योजनाएँ गुप्त रखना भारतीय दर्शन से विचार: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन (Karmaṇyevādhikāraste
दिन 24 (अप्रैल): तूफान में स्थिरता: अराजकता (Chaos) को सामान्य मानना भारतीय दर्शन से विचार: “संसारो बहुदुःखालोको (Saṁsāro Bahuduḥkhāloko): यह