दिन 30 (अप्रैल)
दिन 30 (अप्रैल): आंतरिक शांति: सबसे बड़ा पुरस्कार भारतीय दर्शन से विचार: “समत्वं योग उच्यते (Samatvaṁ Yoga Ucyate): समता (समरूपता […]
दिन 30 (अप्रैल): आंतरिक शांति: सबसे बड़ा पुरस्कार भारतीय दर्शन से विचार: “समत्वं योग उच्यते (Samatvaṁ Yoga Ucyate): समता (समरूपता […]
दिन 29 (अप्रैल): केवल चरित्र की हानि: सच्ची पीड़ा आंतरिक होती है भारतीय दर्शन से विचार: “सत्यं न विनश्यति (Satyaṁ
दिन 28 (अप्रैल): जानबूझकर असुविधा: आरामदायक जीवन को ना कहें भारतीय दर्शन से विचार: “तपसा क्षीयते पापम् (Tapasā Kṣīyate Pāpam):
दिन 27 (अप्रैल): संबंधों का अस्थायीपन: हर लगाव को क्षणिक जानना भारतीय दर्शन से विचार: “सर्वं क्षणभंगुरम् (Sarvaṁ Kṣaṇabhaṅguram): सब
दिन 26 (अप्रैल): सबसे बुरे की तैयारी: मानसिक पूर्वाभ्यास (Premeditatio Malorum) भारतीय दर्शन से विचार: “वैराग्य (Vairāgya) का पहला चरण
दिन 25 (अप्रैल): कार्य, न कि शब्द: अपनी योजनाएँ गुप्त रखना भारतीय दर्शन से विचार: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन (Karmaṇyevādhikāraste
दिन 24 (अप्रैल): तूफान में स्थिरता: अराजकता (Chaos) को सामान्य मानना भारतीय दर्शन से विचार: “संसारो बहुदुःखालोको (Saṁsāro Bahuduḥkhāloko): यह
दिन 23 (अप्रैल): मृत्यु का स्मरण: क्षण की महत्ता जानना भारतीय दर्शन से विचार: “मृत्युर्वा वै (Mṛtyurvai Vai): मृत्यु निश्चित
दिन 22 (अप्रैल): पीड़ा का उपयोग: संघर्ष ही चरित्र का आधार है भारतीय दर्शन से विचार: “दुःखं एवं सर्वं विवेकितः
दिन 21 (अप्रैल): प्रकृति का अनुपालन: अनियंत्रित को स्वीकारना भारतीय दर्शन से विचार: “यथा देहे तथा ब्रह्माण्डे (Yathā Dehe Tathā