दिन 2 (मई)

भारतीय दर्शन से विचार: “क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।” – श्रीमद्भगवद्गीता (2.63)

व्याख्या: “क्रोध से घोर मोह (भ्रम) उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति का नाश होता है (सही-गलत का विवेक समाप्त हो जाता है)।”

Stoicism से उद्धरण: “क्रोध का सबसे बड़ा उपचार देरी है।” – सेनेका (Seneca)

व्याख्या: संबंधों को सबसे अधिक क्षति क्रोध से होती है, जैसा कि गीता हमें चेतावनी देती है कि क्रोध विवेक (Reason) को नष्ट कर देता है। Stoicism इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है: विलंब (Delay)। क्रोध की भावना उठते ही प्रतिक्रिया न करें, बल्कि एक क्षण के लिए रुकें। यह छोटा सा अंतराल हमें तर्क और क्षमा (Forgiveness) को चुनने का अवसर देता है, ताकि हम रिश्ते को नष्ट होने से बचा सकें। स्वस्थ संबंध तभी बनाए रखे जा सकते हैं जब हम उत्तेजना और प्रतिक्रिया के बीच नियंत्रण रखते हैं। अभ्यास: जब भी आपको लगे कि आप क्रोधित हो रहे हैं, तो तुरंत प्रतिक्रिया करने से बचें। इसके बजाय, तीन गहरी साँसें लें और अपने आप से कहें, “मैं अभी प्रतिक्रिया नहीं करूँगा।” अपनी नोटबुक में लिखें कि इस अभ्यास ने आपको किसी रिश्ते में अनावश्यक संघर्ष से कैसे बचाया।

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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