दिन 8 (जून)

भारतीय दर्शन से विचार: “अप्रमादो ह्यमृतपदं प्रमादो मृत्युनो पदं।” – धम्मपद

व्याख्या: “अप्रमाद (सावधानी/Vigilance) अमरता का मार्ग है; प्रमाद (लापरवाही/Negligence) मृत्यु (दुःख) का मार्ग है।”

Stoicism से उद्धरण: “अपने अस्तित्व के उस प्राथमिक स्रोत—अपने निर्णयों—पर सावधानीपूर्वक नज़र रखो।” – एपिक्टेटस (Epictetus)

व्याख्या: ज्ञान (विवेक) कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप एक बार पा लेते हैं; यह एक निरंतर अभ्यास है। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि हमारा मन स्वाभाविक रूप से भटकने वाला (प्रमाद) है, और यदि हम इस पर सतत चौकसी (अप्रमाद/Prosochē) नहीं रखते, तो यह हमें गलत धारणाओं और दुःख की ओर ले जाता है। विवेकवान व्यक्ति हर विचार और धारणा को देखता है, यह सुनिश्चित करता है कि वह केवल तर्क और सद्गुण पर ही आधारित हो। यह Prosochē ही वह आंतरिक कार्य है जो हमें शांति प्रदान करता है।

अभ्यास: आज आप हर घंटे एक आंतरिक अनुस्मारक (Internal Reminder) सेट करें। जब भी आपको याद आए, रुकें और स्वयं से एक प्रश्न पूछें: “इस क्षण मेरे मन में क्या चल रहा है, और क्या यह मेरे सद्गुण/कर्तव्य के अनुरूप है?” इस अभ्यास से आप जागरूकता के साथ लापरवाही (प्रमाद) को दूर करते हैं।

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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