दिन 17 (अगस्त)

भारतीय दर्शन से विचार: “मृत्यु निश्चित है, इसलिए तुम्हारा सबसे बड़ा बल वर्तमान का विवेकपूर्ण उपयोग करने में है।” – जीवित काल (Jīvita Kāla) सिद्धांत का सार

व्याख्या: जीवन का प्रत्येक क्षण (Moment) अमूल्य है क्योंकि यह अस्थायी है। इस सत्य को जानना हमें तुच्छ बातों पर समय बर्बाद करने से बचाता है।

Stoicism से उद्धरण: “ऐसा नहीं है कि हमारे पास जीने के लिए कम समय है, बल्कि यह है कि हम इसमें से बहुत सारा समय बर्बाद कर देते हैं।” – सेनेका (Seneca)

व्याख्या: आघात सहने की शक्ति (Resilience) समय के मूल्य को समझने से उत्पन्न होती है। दोनों दर्शन हमें मृत्यु की निश्चितता (Memento Mori) को याद रखने के लिए कहते हैं, न कि डरने के लिए, बल्कि तत्काल कार्रवाई और प्राथमिकता के लिए। बलवान मन जानता है कि समय (Time) ही एकमात्र वास्तविक धन है जिसे खोया जा सकता है। यह जागरूकता हमें उन सभी व्यर्थ की चिंताओं और विकर्षणों को अस्वीकार करने का बल देती है जो हमारी आंतरिक शक्ति को नष्ट करते हैं।

अभ्यास: आज आप एक गतिविधि पहचानें जिस पर आप आमतौर पर समय खर्च करते हैं, लेकिन वह आपके उच्चतम मूल्यों के अनुरूप नहीं है (जैसे अनावश्यक सोशल मीडिया, अत्यधिक शिकायत)। उस समय को जानबूझकर पुनः प्राप्त करें और उसे एक सद्गुणी कार्य (जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य पर काम करना, पढ़ना, या किसी की मदद करना) पर खर्च करें। पुष्टि करें: “मैं समय को मूल्यवान मानता हूँ; मैं इसे विवेक से उपयोग करूँगा।”

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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