Daily Vedic mantras with simple explanations to spread Vedic wisdom.

  • Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ ||
    Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ || यं देवासस्त्रिरहन्नायजन्ते दिवे दिवे वरुणो मित्रो अग्नि:!सेमं यज्ञं मधुमन्तं कृधी नस्तनूनपाद् घृतयोनिं विधयन्तम्! हम प्रभु का ही स्मरण करें, प्रभु हमें पापों व रोगों से बचाकर आगे ले चलेंगे! हमारा जीवन मधुर, ज्ञान प्रवण व पूजा वृत्ति वाला बनेगा! व्याख्या यम् देवास: दिवे दिवे अहन् त्रि:आजयन्ते जिस प्रभु को… Read more: Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ ||
  • Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-१ ||
    Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-१ || समित्समित्सुमना बोध्यस्मे शुचाशुचा सुमतिं रासि वस्व:आ देव देवान्यजथाय वक्षि सखा सखीन्त्सुमना यक्ष्यग्ने! ज्ञान के अनुपात में हमारा मन पवित्र होता है! पवित्रता के अनुपात में हम धन कमाने के विषय में सुमति को बनायें रखते हैं! देवों के सम्पर्क में चलते हैं! प्रभु रुप मित्र से सब धनों को… Read more: Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-१ ||

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