दिन 4 (अगस्त)

भारतीय दर्शन से विचार: “सब कुछ क्षणभंगुर (Momentary) है; उन्हें पकड़कर रखने का प्रयास ही दुःख है।” – अनित्यता (Anitya) सिद्धांत का सार

व्याख्या: इस ब्रह्मांड का मूल नियम ही परिवर्तन है। जब हम स्थायित्व की अपेक्षा करते हैं, तो हम वास्तविकता से लड़ते हैं, और हमारी शक्ति टूट जाती है।

Stoicism से उद्धरण: “तुम्हारा जीवन नदी जैसा है; स्थायित्व की आशा करना भ्रम है।” – Stoic सिद्धांत का सार (Flux)

व्याख्या: आघात सहने की शक्ति (Resilience) इस सत्य को हृदय से स्वीकार करने में है कि सब कुछ बदल जाएगा (Anitya और Mutatio)। जब मन लोगों, संपत्ति या स्थितियों से इस आशा में चिपक जाता है कि वे हमेशा रहेंगे, तो वह कमजोर हो जाता है। एक अडिग मन इस प्रवाह को स्वीकार करता है। वह जानता है कि हानि (Loss) केवल स्वाभाविक परिवर्तन की अभिव्यक्ति है। परिवर्तन को बिना प्रतिरोध के स्वीकार करके, हम भविष्य के दुखों के विरुद्ध अपनी आंतरिक शांति को सुरक्षित करते हैं।

अभ्यास: आज आप एक बाहरी चीज़ पहचानें जिस पर आप निर्भर करते हैं या जिसे खोने से डरते हैं (उदाहरण: किसी प्रिय वस्तु, आपकी वर्तमान नौकरी की स्थिति)। मानसिक रूप से उस चीज़ की पूर्ण हानि की कल्पना करें। फिर दृढ़ता से कहें: “यह अनित्य (Transient) है; मैं इसे प्रेम करता हूँ, लेकिन इस पर निर्भर नहीं हूँ। मेरी शक्ति आंतरिक है।”

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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