दिन 20 (अगस्त)

भारतीय दर्शन से विचार: “बाहर का शोर तुम्हारे शम (Śama) को भंग नहीं कर सकता; तुम्हारी शक्ति भीतर की शांति में है।” – शम (Śama) सिद्धांत का सार

व्याख्या: शम का अर्थ है मन की पूर्ण शांति और स्थिरता। यह वह आधार है जिस पर हमारी आंतरिक शक्ति टिकी होती है; अशांत मन कभी बलवान नहीं हो सकता।

Stoicism से उद्धरण: “आंतरिक शांति ही तूफान में तुम्हारा लंगर (Anchor) है। इसे किसी भी कीमत पर बनाए रखो।” – अटारैक्सिया (Ataraxia) सिद्धांत का सार

व्याख्या: आघात सहने की शक्ति (Resilience) मानसिक शांति (Tranquility) पर निर्भर करती है। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि निरंतर अशांत मन (Agitated Mind) किसी भी छोटे झटके से बिखर जाता है। बलवान मन दैनिक रूप से स्थिरता (Stillness) का अभ्यास करता है, जिससे वह अपने भीतर शांति का एक गहन भंडार (Reservoir) बना लेता है। यह भंडार बाहरी chaos को नियंत्रित प्रतिक्रिया में बदलने की शक्ति देता है।

अभ्यास: आज आप 5 मिनट के लिए शांति से बैठें। अपनी आँखें बंद करें और अपने विचारों को बिना आँके या प्रतिक्रिया दिए देखें। जब कोई बाहरी शोर या आंतरिक चिंता उत्पन्न हो, तो उसे स्वीकार करें और धीरे से अपने ध्यान को अपने शांत केंद्र (Center of Stillness) पर वापस लाएँ। पुष्टि करें: “मेरा मन शांत है; मैं अडिग हूँ।”

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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