Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ ||
Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ || यं देवासस्त्रिरहन्नायजन्ते दिवे दिवे वरुणो मित्रो अग्नि:!सेमं यज्ञं मधुमन्तं कृधी नस्तनूनपाद् घृतयोनिं विधयन्तम्! हम […]
Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-२ || यं देवासस्त्रिरहन्नायजन्ते दिवे दिवे वरुणो मित्रो अग्नि:!सेमं यज्ञं मधुमन्तं कृधी नस्तनूनपाद् घृतयोनिं विधयन्तम्! हम […]
Ved-Vaani – ऋग्वेद || ४-४-१ || समित्समित्सुमना बोध्यस्मे शुचाशुचा सुमतिं रासि वस्व:आ देव देवान्यजथाय वक्षि सखा सखीन्त्सुमना यक्ष्यग्ने! ज्ञान के
हरियाणा के कवि सम्राट् –चौ० ईश्वरसिंह जी ‘गहलोत’68 वें स्मृति दिवस पर कोटि कोटि नमन विषय को प्रारम्भ करने से
दिनांक : 13 जुलाई 2025, रविवार आर्य समाज द्वारका , दिल्ली द्वारा आयोजित भजन सत्संग वैदिक भजनोंपदेशक : श्री विनोद