दिन 15 (अगस्त)

भारतीय दर्शन से विचार: “दूसरों को निष्पक्षता (Fairness) से देखना तुम्हारे अपने मन को संतुलित (समत्व) रखता है।” – समत्व (Samatva) सिद्धांत का सार

व्याख्या: समत्व का अर्थ है सभी के प्रति समान भाव रखना। यह आंतरिक शक्ति का स्रोत है, क्योंकि यह हमारे मन को पक्षपात (Bias) और आक्रोश से बचाता है।

Stoicism से उद्धरण: “दूसरों के प्रति अन्याय करना तुम्हारे चरित्र को सबसे बड़ा आघात पहुँचाता है।” – मार्कस ऑरेलियस के सिद्धांत का सार

व्याख्या: आघात सहने की शक्ति (Resilience) इस बात पर निर्भर करती है कि आप दूसरों के साथ कितना न्याय (Justice) करते हैं। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि जब हम पक्षपात (Partiality) या अन्याय से कार्य करते हैं, तो हम अपनी नैतिक नींव को कमजोर करते हैं। बलवान मन निष्पक्ष रहता है। वह हर व्यक्ति को, चाहे वह मित्र हो या प्रतिद्वंद्वी, समान सम्मान और तर्कसंगत व्यवहार देता है। यह समत्व (Equanimity) का अभ्यास हमारे आंतरिक संतुलन को बाहरी अराजकता से मज़बूत रखता है।

अभ्यास: आज आप दो अलग-अलग व्यक्तियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया पर ध्यान दें: 1) कोई ऐसा व्यक्ति जिसे आप बहुत पसंद करते हैं, और 2) कोई ऐसा व्यक्ति जिसे आप नापसंद करते हैं। सचेत रूप से दोनों व्यक्तियों के साथ समान स्तर के सम्मान, निष्पक्षता, और शांत भाषा का प्रयोग करें। पुष्टि करें: “मेरा व्यवहार निष्पक्षता (Samatva) से निर्देशित होगा, भावना से नहीं।”

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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