दिन 10 (अगस्त)

भारतीय दर्शन से विचार: “केवल आज ही हमारा है; कल की चिंता आज की शक्ति को नष्ट करती है।” – धारणा (Dhāraṇā) सिद्धांत का सार

व्याख्या: धारणा (Concentration) ही वह मानसिक बल है जो हमें अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त रखता है।

Stoicism से उद्धरण: “एक मनुष्य केवल वर्तमान को ही खो सकता है; क्योंकि उसके पास कोई और क्षण है ही नहीं।” – मार्कस ऑरेलियस (Marcus Aurelius)

व्याख्या: आघात सहने की शक्ति (Resilience) तब क्षीण होती है जब हमारा मन अनियंत्रित समय (अतीत और भविष्य) में भटकता रहता है। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि मानसिक बल केवल वर्तमान क्षण में पूरी तरह जीने से आता है। अडिग मन अपने सारे कर्तव्य (कर्म) को केवल आज के दायरे में रखता है। धारणा का अभ्यास करके, हम अपने मन को वर्तमान कार्य में लंगर डालते हैं, जिससे चिंता और भय के मनोवैज्ञानिक हमले कम हो जाते हैं।

अभ्यास: आज आप एक दैनिक गतिविधि चुनें जिसमें आपका मन अक्सर भटक जाता है (जैसे टहलना, इंतजार करना या कोई दोहराव वाला काम)। इस गतिविधि के दौरान, पाँच मिनट के लिए जानबूझकर अपने मन को वर्तमान के संवेदी विवरणों (दृष्टि, ध्वनि, स्पर्श) पर लाएँ। जब भी मन अतीत या भविष्य की ओर मुड़े, धीरे से पुष्टि करें: “केवल यह क्षण ही मेरा कर्तव्य है।”

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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