दिन 21 (जुलाई)

भारतीय दर्शन से विचार: “मनोपुब्बङ्गमा धम्मा मनोसेट्ठा मनोमया।” – धम्मपद (Dhammapada)

व्याख्या: “मन सभी मानसिक अवस्थाओं का अग्रदूत है। मन ही प्रधान है, और सभी चीजें मन से ही बनी हैं।” (हमारे सभी कार्य हमारे इरादे (Smṛti) से शुरू होते हैं।)

Stoicism से उद्धरण: “अपनी बुद्धि (Hēgemonikon) पर पहरा दो, क्योंकि यही तुम्हारे सभी कार्यों को निर्देशित करती है।” – मार्कस ऑरेलियस के सिद्धांत का सार

व्याख्या: सच्चा साहस (Sāhas) केवल इरादे की स्पष्टता में पाया जाता है। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि हमारा मन (Mind) ही हमारी सभी क्रियाओं का एकमात्र शासक (Hēgemonikon) है। जब हम बिना सोचे-समझे काम करते हैं, तो हम अपनी शक्ति खो देते हैं। साहसी व्यक्ति आवेग (Impulse) पर नहीं, बल्कि सचेत इरादे (Smṛti) पर कार्य करता है। वह लगातार अपनी बुद्धि की गुणवत्ता की जाँच करता है, यह सुनिश्चित करता है कि उसका प्रत्येक कर्म एक तर्कसंगत और सद्गुणी उद्देश्य से निर्देशित हो।

अभ्यास: आज आप एक आदत वाला कार्य पहचानें जिसे आप आमतौर पर बिना सोचे करते हैं (जैसे दरवाज़ा खोलना, संदेश भेजना)। कार्य शुरू करने से पहले, दो सेकंड के लिए रुकें और अपने तर्कसंगत इरादे को स्पष्ट रूप से बताएँ (Smṛti)। कार्य के दौरान, पूरी संवेदी जागरूकता बनाए रखें, जल्दी करने या भटकने की प्रवृत्ति पर जानबूझकर नियंत्रण करें।

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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