दिन 29 (मई)

भारतीय दर्शन से विचार: “सभी जीवों के प्रति मित्रता (मैत्री) का भाव मन को शांत करता है।” – योगसूत्र (1.33) का सार

व्याख्या: मैत्री वह सद्भावना है जो हम सभी के लिए, बिना किसी अपेक्षा के, रखते हैं। यह एक आंतरिक अवस्था है जो मन को शांत करती है।

Stoicism से उद्धरण: “दयालुता अजेय है, यदि वह वास्तविक हो।” – मार्कस ऑरेलियस (Marcus Aurelius)

व्याख्या: संबंधों में सबसे अधिक मूल्यवान है रोज़मर्रा की दयालुता। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि हमें दयालुता को एक असाधारण कार्य के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक दैनिक आदत (मैत्री) के रूप में देखना चाहिए। जब हम अपने दिल में सभी के लिए सद्भावना (Goodwill) रखते हैं, तो हम स्वयं के लिए शांति पैदा करते हैं। Stoic सिद्धांत हमें याद दिलाता है कि वास्तविक दयालुता (जो बिना किसी अपेक्षा के की जाती है) में वह शक्ति होती है कि वह किसी भी नकारात्मकता को दूर कर सकती है—यह सबसे शक्तिशाली सामुदायिक उपकरण है।

अभ्यास: आज आप उन लोगों के लिए तीन छोटे, गुमनाम (Anonymous) दयालुता के कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हों जिन्हें आप अच्छी तरह से नहीं जानते (जैसे, किसी के लिए दरवाज़ा खोलना, किसी अजनबी को सच्ची प्रशंसा देना)। अपने कार्य के परिणाम पर नहीं, बल्कि उस मैत्री की भावना पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके मन में उत्पन्न होती है।

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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