दिन 9 (मई)

भारतीय दर्शन से विचार: “दूसरों की सफलता में प्रसन्नता ही चित्त को शांत करती है।” – योग दर्शन (ब्रह्मविहार)

व्याख्या: यह मुदिता (Muditā) की अवधारणा है, जिसका अर्थ है दूसरों के सुख और समृद्धि में सच्ची खुशी महसूस करना।

Stoicism से उद्धरण: “मनुष्य को प्रकृति द्वारा अपने साथियों के आपसी लाभ के लिए जीने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” – मार्कस ऑरेलियस (Marcus Aurelius)

व्याख्या: सहनशील और स्वस्थ संबंध बनाए रखने के लिए, हमें ईर्ष्या (Jealousy) को सक्रिय रूप से दूर करना होगा। दोनों दर्शन सिखाते हैं कि जब हम दूसरों की सफलता या खुशी से जलन महसूस करते हैं, तो हम न केवल उस रिश्ते को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि अपनी आंतरिक शांति को भी भंग करते हैं। इसके बजाय, मुदिता का अभ्यास करें: दूसरों की भलाई को सामूहिक कल्याण (mutual benefit) का हिस्सा मानें। यह चुनाव हमें अपने प्राकृतिक, परोपकारी स्वभाव के करीब लाता है और संबंधों को मजबूत करता है।

अभ्यास: आज आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें जिसने हाल ही में कोई सकारात्मक उपलब्धि हासिल की हो। तुलना किए बिना, 60 सेकंड के लिए जानबूझकर उस व्यक्ति के लिए सच्ची खुशी (मुदिता) की भावना महसूस करें। अपनी नोटबुक में लिखें कि इस सक्रिय प्रसन्नता ने आपके मन में उठने वाली किसी भी नकारात्मक भावना को कैसे कम किया।

प्रस्तुति
डॉ आनंद कुमार शर्मा द्वारा संकलित और सम्पादित पुस्तक “भारतीय दर्शन और पश्चिमी योग (Stoicism)-365 आध्यात्मिक अभ्यास” से साभार

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